वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। महंगे तेल से भारत के आयात बिल और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ने की चिंता है।

रॉयटर्स के मुताबिक, रुपया करीब 0.3 प्रतिशत कमजोर होकर 95.70 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा, जब भारतीय मुद्रा में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है।
बाजार के जानकारों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया। सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री भी देखी गई।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से रुपये पर दबाव के साथ-साथ महंगाई और देश के व्यापार संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।


