इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक मानसिक रूप से दिव्यांग दुष्कर्म पीड़िता को ₹10 लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। पीड़िता वर्ष 2023 में कथित यौन उत्पीड़न के बाद गर्भवती हो गई थी और उस समय उसकी उम्र 17 वर्ष थी। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने पीड़िता के नाना द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता समाज के अत्यंत संवेदनशील और कमजोर वर्ग से संबंधित है, इसलिए राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि उसे उचित सुरक्षा, सहायता और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। अदालत ने पीड़िता की मानसिक स्थिति और परिवार की कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संबंधित पीड़ित मुआवजा योजना के तहत ₹10 लाख की राशि जारी करने का निर्देश दिया।
इस मामले ने एक बार फिर दिव्यांग और विशेष जरूरतों वाले यौन हिंसा पीड़ितों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर किया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह फैसला पीड़िता को चिकित्सा, पुनर्वास और आर्थिक सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जबकि आरोपी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की सुनवाई आगे जारी रहेगी।


