बड़ार (हमीरपुर)। बड़ार गांव के करीब 20 परिवार आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। मुख्य सड़क से सीधा संपर्क न होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि प्रभावित परिवारों में सेवारत और सेवानिवृत्त सेना के जवानों के परिवार भी शामिल हैं।
सड़क सुविधा के अभाव में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को परेशानी होती है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, राशन एवं निर्माण सामग्री गांव तक लाने तथा आपात स्थिति में वाहन पहुंचाने में भी काफी दिक्कत आती है। बरसात के दौरान स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के कई परिवारों ने देश की रक्षा में अपना योगदान दिया है और गांव के अनेक युवा आज भी सशस्त्र सेनाओं में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उनके परिवार अपने ही गांव में बुनियादी सड़क सुविधा के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र से संबंध रखने वाले एक सेवारत कर्नल प्रदीप कुमार पटियाल ने भी प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए आवश्यक हिस्से में अपनी निजी भूमि स्वेच्छा से उपलब्ध करवाने की सहमति भी जताई है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत द्वारा वर्ष 2023 में सड़क निर्माण के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाई है।
प्रस्तावित सड़क बनने से करीब 20 घर मुख्य सड़क से सीधे जुड़ जाएंगे। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और रोजगार जैसी आवश्यक सुविधाओं तक ग्रामीणों की पहुंच आसान होगी। आपातकालीन परिस्थितियों में भी यह सड़क महत्वपूर्ण साबित होगी।
ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से सड़क निर्माण को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करवाने की मांग की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश की सेवा में योगदान देने वाले सैनिकों के परिवारों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए सरकार शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेगी।


