पंजाब के संगरूर जिले के तूर बंजारा गांव के रहने वाले गुलजार सिंह की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। परिवार का आरोप है कि गांव में बढ़ते नशे, खासकर चिट्टे, का मुद्दा पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने उठाने के बाद गुलजार सिंह पर कथित तौर पर दबाव बनाया गया और उन्हें धमकाया व अपमानित किया गया।
परिवार के मुताबिक, एक सार्वजनिक कार्यक्रम में गुलजार सिंह ने मंत्री के सामने बताया था कि उनका बेटा भी नशे की चपेट में है और गांव में नशे की समस्या लगातार बढ़ रही है। परिवार का आरोप है कि इसके बाद उनसे माफी मांगने के लिए दबाव बनाया गया। कुछ समय बाद गुलजार सिंह ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

मामले में पुलिस ने गांव की सरपंच समेत पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि गुलजार सिंह का अंतिम संस्कार उनकी सहमति के बिना कराया गया और उन्हें अंतिम दर्शन तक नहीं करने दिए गए।
वहीं प्रशासन का कहना है कि परिवार के साथ बातचीत के बाद अंतिम संस्कार कराया गया था। प्रशासन की ओर से परिवार को ₹5 लाख मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है। मामले को लेकर विपक्षी दलों ने पंजाब की AAP सरकार को घेरा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी गुलजार सिंह की मौत की परिस्थितियों को लेकर पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी है।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन की जांच जारी है। गुलजार सिंह की मौत के पीछे कथित दबाव की क्या भूमिका थी और अंतिम संस्कार को लेकर परिवार के आरोपों में कितनी सच्चाई है, इसका अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


