हिमाचल प्रदेश के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी एक खबर ने लोगों की सेहत और पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मामला नालागढ़ के माजरा गांव का है, जहां ग्रामीणों ने आसपास की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले खतरनाक कचरे और उसके निपटारे को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसका असर इलाके के पर्यावरण, जमीन के नीचे मौजूद पानी और लोगों की सेहत पर पड़ सकता है।
माजरा गांव के आसपास कई औद्योगिक इकाइयां हैं और उनसे निकलने वाले खतरनाक कचरे के उपचार और निपटारे के लिए एक विशेष संयंत्र भी बनाया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कचरे के कारण आसपास का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है और भूमिगत पानी के दूषित होने की आशंका है। कुछ लोगों ने दूषित पानी और प्रदूषण को त्वचा संबंधी बीमारियों सहित दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ते हुए चिंता जताई है। ग्रामीणों ने पशुओं के बीमार पड़ने और उनकी मौत को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
यह मामला अब हिमाचल प्रदेश विधानसभा तक पहुंच चुका है। बद्दी के विधायक हरदीप सिंह बावा ने विधानसभा में खतरनाक कचरे और कथित दूषित पानी से लोगों की सेहत पर पड़ने वाले असर का मुद्दा उठाते हुए सरकार से गंभीरता से कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अभी यह वैज्ञानिक तौर पर साबित नहीं हुआ है कि माजरा में सामने आ रही सभी स्वास्थ्य समस्याओं की सीधी वजह औद्योगिक प्रदूषण या खतरनाक कचरा ही है। इसके लिए पानी, मिट्टी और हवा की वैज्ञानिक जांच के साथ प्रभावित लोगों की मेडिकल जांच भी जरूरी होगी। वहीं, क्षेत्र के भूमिगत पानी को लेकर हुई एक वैज्ञानिक जांच में कई नमूने पीने के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए हैं, जिससे चिंता और बढ़ गई है। अब इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच से ही यह साफ हो सकेगा कि औद्योगिक गतिविधियों और स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं के बीच वास्तव में कोई सीधा संबंध है या नहीं।



